दुआ-ए-कुनूत (वितर)
हवाला: Sunan al-Bayhaqi, Musannaf Ibn Abi Shaybah
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ يَفْجُرُكَ. اللَّهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَلَكَ نُصَلِّي وَنَسْجُدُ وَإِلَيْكَ نَسْعَى وَنَحْفِدُ وَنَرْجُو رَحْمَتَكَ وَنَخْشَى عَذَابَكَ إِنَّ عَذَابَكَ بِالْكُفَّارِ مُلْحِقٌ
अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका व नस्तग़फ़िरुका व नूमिनु बिका व नतवक्कलु अलैका व नुस्नी अलैकल ख़ैरा व नश्कुरुका वला नक्फ़ुरुका व नख़्लउ व नत्रुकु मंय्यफ़्जुरुका। अल्लाहुम्मा इय्याका नाबुदु व लका नुसल्ली व नस्जुदु व इलैका नस्आ व नह्फ़िदु व नरजू रहमतका व नख़्शा अज़ाबका, इन्ना अज़ाबका बिल्कुफ़्फ़ारि मुल्हिक़।
ऐ अल्लाह! हम तुझसे मदद चाहते हैं और तुझसे माफी मांगते हैं और तुझ पर ईमान लाते हैं और तुझ पर भरोसा करते हैं और तेरी अच्छी तारीफ करते हैं। हम तेरा शुक्र अदा करते हैं और तेरी नाशुक्रगुजारी नहीं करते। जो तेरी नाफरमानी करे हम उससे अलग होते हैं और उसे छोड़ते हैं। ऐ अल्लाह! हम तेरी ही इबादत करते हैं और तेरे ही लिए नमाज़ पढ़ते और सजदा करते हैं। तेरी ही तरफ दौड़ते और खिदमत के लिए हाजिर होते हैं। तेरी रहमत की उम्मीद रखते हैं और तेरे अज़ाब से डरते हैं। बेशक तेरा अज़ाब काफिरों को मिलने वाला है।
फ़ज़ीलत: वितर नमाज़ की तीसरी रकात में पढ़ना ज़रूरी है।
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