तुममें से कोई मोमिन नहीं जब तक अपने भाई के लिए वही न चाहे
हवाला: Sahih al-Bukhari 13; Sahih Muslim 45 (Nawawi's Forty, no. 13)
तुममें से कोई शख़्स उस वक़्त तक (कामिल) मोमिन नहीं हो सकता जब तक अपने भाई के लिए वही न चाहे जो अपने लिए चाहता है।
रावी: अनस बिन मालिक रज़ि०।
सहीह बुख़ारी 13; सहीह मुस्लिम 45.
ऐसे ही और
रहम करने वालों पर रहम किया जाता है
ज़मीन वालों पर रहम, और आसमान वाले की तरफ़ से रहम।
अल्लाह तुम्हारी सूरतों को नहीं देखता
तौला क्या जा रहा है और क्या नहीं।
पहलवान वो नहीं जो पछाड़ दे
ताक़त की एक नई तारीफ़, एक ही जुमले में।
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